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Showing posts from February, 2022

उच्च शिक्षा में महिलाएं

 महिलाएं समाज की वास्तविक वास्तुकार होती हैं  अगर कोई घर  या ऑफिस  सही वास्तु के हिसाब से   ना बना हो  तो वह शुभ फल नहीं देता | यही बात महिलाओं की शिक्षा के लिए लागू होती है  क्योंकि महिलाएं ही समाज का  समाज का स्वरूप  है  | अगर महिलाएं खुद  अच्छी स्थिति में नहीं होंगी   तो वह भला सभ्य समाज  के निर्माण में  क्या  भूमिका निभाएगी  ? यह हम सब समझ सकते हैं  हम सब वूमेन इंप्रूवमेंट  की बात तो बहुत करते हैं  अगर महिलाओं को सशक्त बनाना है  तो शिक्षा ही  उस दिशा में  पहला कदम है |                किसी भी परिवार में  मुखिया भले ही पुरुष हो  लेकिन महिला उस घर का  एक मजबूत   स्तंभ होतीं है ।  जिस पर पूरे घर  का भविष्य टिका रहता है  घर को सुचारू  और  सुनियोजित  तरीके से चलाने के लिए  दोनों का समझदार  व शिक्षित होना  आवश्यक है।  विपरीत परिस्थितियों में  भी  शि...

आत्मनिर्भरता की नई परिभाषा गढ़ते युवा

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     किस प्रकार अपना व्यवसाय भी हमे आत्मनिर्भर बनाता हैं, इस पर प्रस्तुत है, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय मै कैंटीन  चलाने वाले श्री विकास जी के साथ हुई बातचीत के  मुख्य अंश।    प्रश्न  आप सबसे पहले हमें अपने बारे में कुछ बतायें ?                                                                                                      उत्तर-   जी ,मेरा नाम विकास हैं ओर मै ज्यादा पढ़ा लिखा नही हूँ।  बस में थोड़ा बहुत हिसाब किताब लगा लेता हूं  मै भिवानी का ही रहना वाला हूँ ।मेरे को यहाँ पर दुकान का काम करते हुए पांच साल हो चुके हैं में इसी दुकान से अपना घर खर्च चलाता हूँ। प्रश्न.क्या आप इस दुकान से आत्मनिर्भर हैं?             उत्तर-  हाँ जी,मै...

संपादकीय पत्र

 सेवा में, संपादक महोदय, दैनिक जागरण भिवानी, 127111 विषय  -  सम्पादकीय पृष्ठ पर महिला मुद्दोंको प्राथमिकता देते हुए। महोदय,                 मैं मंजू भिवानी से आपकी नियमित पाठक हूँ ।आपके सम्पादकीय पृष्ठ अत्यधिक ज्ञानवर्धक हैं अभी हाल ही मैंने इसमे महिलाओं से सम्बंधित अग्रलेख पढ़ा जो कि बहुत ज्यादा सूचनात्मक व ज्ञानवर्धक हैं। महोदय मैं आपसे अनुरोध करना चाहती हूं कि आप अपने समाचार पत्र में महिलाओं से सम्बंधित आलेख को अवश्य शामिल करें। मुझे पूरा विशवास हैं कि आपके इस पहल से हमारे समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा । आपके अख़बार की विश्वनीयता  ओर लोकप्रियता  हम पाठकों को बहुत ही आशा प्रदान करती हैं ।आपसे हमें यही उम्मीद है कि आप मेरे इस पत्र को अपने समाचार पत्र में स्थान देगें।  शुभकामनाओं सहित मंजू भिवानी, 127111 12 -2-2022

उम्मीद

उम्मीद के साथ चलती ह जिंदगी,                 उम्मीद ना हो तो जिंदगी रुक सी जाती है, उम्मीद ही तो हमे जीना सिखाती हैं,                वो उम्मीद ही तो हैं जो हमे डर का सामना करने की हिम्मत देती है, उम्मीद हैं उस किसान को जो खेतो में फसल उगाता हैं कि अच्छी फसल मिलेंगी,                                     उम्मीद हैं उस शिक्षक जो बच्चों को पढ़ाता हैं, कि एक दिन वो बच्चे जरूर देश का भविष्य उज्ज्वल करेगे। उम्मीद हैं उस माँ को जिसका बेटा बॉर्डर पर देश के लिए लड़ रहा हैं। उम्मीद हैं उस माँ को की वह सही सलामत होगा , ये उम्मीद ही हमे जीना सिखाती हैं ,जिस दिन ये उम्मीदें टूटी , उस दिन इन्सान खुद टूटकर बिखर जाएगा।

जिंदगी

पाने को कुछ नही , ले जाने को कुछ नही, उड़ जाएंगे एक दिन, तस्वीर से रंगों की तरह हम वक्त की टहनी पर ....... बैठे हैं परिंदो की तरह खटखटाते रहिये दरवाजा....... एक दूसरे के मन का, मुलाकात ना सही , आहटे आती रहनी चाहिए नाराज हैं....."जिंदगी" बस जो है वो आज है ......"जिंदगी"

Md

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