उच्च शिक्षा में महिलाएं

 महिलाएं समाज की वास्तविक वास्तुकार होती हैं  अगर कोई घर  या ऑफिस  सही वास्तु के हिसाब से   ना बना हो  तो वह शुभ फल नहीं देता | यही बात महिलाओं की शिक्षा के लिए लागू होती है  क्योंकि महिलाएं ही समाज का  समाज का स्वरूप  है  | अगर महिलाएं खुद  अच्छी स्थिति में नहीं होंगी   तो वह भला सभ्य समाज  के निर्माण में  क्या  भूमिका निभाएगी  ? यह हम सब समझ सकते हैं  हम सब वूमेन इंप्रूवमेंट  की बात तो बहुत करते हैं  अगर महिलाओं को सशक्त बनाना है  तो शिक्षा ही  उस दिशा में  पहला कदम है |

      

        किसी भी परिवार में  मुखिया भले ही पुरुष हो  लेकिन महिला उस घर का  एक मजबूत   स्तंभ होतीं है ।  जिस पर पूरे घर  का भविष्य टिका रहता है  घर को सुचारू  और  सुनियोजित  तरीके से चलाने के लिए  दोनों का समझदार  व शिक्षित होना  आवश्यक है।  विपरीत परिस्थितियों में  भी  शिक्षित महिला  अपने धैर्य    व  बुद्धि  विवेक का इस्तेमाल  कर    परिस्थितियों को अनुकूल  बना देती है   ।एक शिक्षित महिला  उस वक्त काम आती है  जब परिवार  किसी आर्थिक  कठिनाई से गुजर रहा  हो  ऐसे में महिलाएं घर से बाहर निकल कर   परिवार को आर्थिक  मजबूती दे सकती  है  या  घर पर ही रह कर  स्वरोजगार  के माध्यम से  परिवार की तंगी  से बाहर निकालने में  मदद करती है  । यदि  हमें अब अपनी आर्थिक स्थिति   सुधारनी है   तो महिला व पुरुष  दोनों को समान   मानना जरूरी है  और इसी को आगे  कैसे ले जाए जाए  इसके लिए पूरे विश्वविद्यालय   महिला सशक्तिकरण योजनाएं   चलाई   गई है  । इसमें औरतों की आर्थिक ,मानसिक , सामाजिक और राजनीतिक  रूप से सशक्त किया  जा रहा है ।  जिससे कि वह पुरुषों के  साथ कंधे से कंधा  मिला कर चल सकें   और के औरतों  के अधिकारों  का   ज्ञान  हो सके  इन सब चीजों के लिए  महिला का शिक्षित होना  बहुत महत्वपूर्ण है  महिला सशक्तिकरण में   उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण  योगदान है ।

      स्वतंत्रता के बाद  से सरकार  द्वारा कई प्रकार के संस्था  और योजनाए चलाई गई  कहीं शिक्षा से    जुड़े  तो कहीं अधिकारों से जुड़ी  और  हर जगह  महिलाएं पुरुषों    को बराबर  की  मात  देते आई  है ।  चाहे  खेलकूद हो या शिक्षा   कई महिलाओं ने  तो  विश्व में  अपने देश  का नाम भी  रोशन  किया हैं। लेकिन अभी भी  कुछ ऐसी जगह  है जहां   शिक्षा का अभाव   है  कुछ समय पहले   की जनगणना  से पता चलता है कि  अभी भी  अशिक्षित लोगों  में  बहुत से  लोग हैं  और  उनमें 65%  लड़कियां हैं  ।जहां शहर  की   शिक्षित महिलाओं की  जनसंख्या 72.99%  गांव  की 45.50%   है इसका  मतलब अभी भी  50%  महिला   अशिक्षित  है।  उच्च प्राथमिक शिक्षा 50.76  प्रतिशत लड़कियों को  घरेलू समस्याओं के    कारण स्कूल कॉलेज छोड़ना पड़ता है ।   स्कूल  वे  कॉलेज का दूर  होना  ,यातायात के  अनुपलब्धता,  घरेलू कामकाज,  छोटे भाई -बहनों की  देखरेख  ,आर्थिक व  विभिन्न  सामाजिक समस्या  आदि  इन सभी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है  अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए ।

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